Thursday, February 19, 2015

उमर खय्यामच्या रुबाया - एक नशीला काव्यप्रकार !


उमर खय्यामच्या रुबाया
मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवाला,
किस पथ से जाऊँ? असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ -
राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला ।